बर्लिनः प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध में दुनिया के सबसे बड़े खलनायक रहे जर्मनी के खूंखार तानाशाह रहे एडोल्फ हिटलर की कहानी जितनी दिलचस्प है, उससे ज्यादा खतरनाक और क्रूर भी है। हिटलर को 20वीं सदी का सबसे विवादास्पद और खूंखार तानाशाह माना जाता है। हिटल ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 30 अप्रैल 1945 को बर्लिन के फ्यूहरर बंकर में विपरीत परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली थी। उस समय सोवियत संघ की सेना ने बर्लिन पर हमला बोल दिया था। हिटलर ने जब तय कर लिया कि उसे अगले दिन मरना है तो उससे एक दिन पहले अपनी प्रेमिका से शादी रचाई।
हिटलर ने क्यों की आत्महत्या?
हिटलर को जब यह एहसास हो गया कि इस युद्ध में जर्मनी की हार निश्चित है तो उसने आत्महत्या करने का विचार बनाया, क्योंकि इसमें खुद हिटलर की जान भी मुश्किल में थी। लिहाजा दुश्मन के हाथों मरने से बेहतर आत्महत्या करना ही हिटलर ने उचित समझा। लिहाजा 20 अप्रैल 1889 को जन्मे हिटलर ने 30 अप्रैल 1945 को साइनाइड कैप्सूल खाकर और सिर में गोली मारकर सुसाइड कर लिया। इसके बाद हिटलर की प्रेमिका और एक दिन पहले ही उसकी नई पत्नी एवा ब्रॉन ने भी साइनाइड खाकर अपनी जान दे दी। बाद में बंकर से दोनों के शवों को बरामद करके बाहर गार्डन में पेट्रोल डालकर जला दिया गया। हिटलर की आत्महत्या का कारण युद्ध में संभावित हार और उसके बाद दुश्मन के हाथों मारे जाने या कैद होने का डर था। इसलिए हिटलर ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
बर्लिन की लड़ाई में घिर चुका था जर्मनी
अप्रैल 1945 में बर्लिन की लड़ाई में जर्मन सेना पूरी तरह दुश्मनों से घिर चुकी थी। हिटलर ने बंकर में रहते हुए आखिरी दिनों तक उम्मीद लगाए रखी कि कोई चमत्कार हो जाएगा, लेकिन जब उसे जर्मनी की हार तय लगने लगी तो 28-29 अप्रैल को उसने अपना वसीयतनामा लिखा। इस वसीयतनामे में उसने जर्मनी के लोगों की प्रशंसा की और यहूदियों को युद्ध का जिम्मेदार ठहराया। हिटलर ने कहा कि वह जीवित दुश्मनों के हाथों में नहीं आएगा। आत्महत्या करने से 24 घंटे पहले हिटलर ने 29 अप्रैल को एवा ब्रॉन से शादी की और 30 अप्रैल की दोपहर में दोनों ने आत्महत्या कर ली। हिटलर की सेक्रेटरी ट्राउडल जंगे और अन्य गवाहों के अनुसार वह कैद होकर अपमानित होने से बचना चाहता था।
क्या है हिटलर की कहानी?
हिटलर का जन्म 20 अप्रैल 1889 को ऑस्ट्रिया के ब्राउनाऊ अम इन में हुआ था। उसके पिता एलोइस सख्त स्वभाव के कस्टम अधिकारी थे, जबकि मां क्लारा से वह बेहद लगाव रखता था। स्कूली पढ़ाई में हिटलर औसत दर्जे का छात्र था और कला में उसकी विशेष रुचि थी। 1907-08 में वियना की आर्ट अकादमी में दो बार असफल रहने के बाद वहां हिटलर गरीबी में रहा। काफी समय तक पोस्टकार्ड बेचकर गुजारा किया। प्रथम विश्व युद्ध में वह जर्मनी की सेना में भर्ती हो गया। जहां युद्ध के दौरान घायल होने पर उसे आयरन क्रॉस मिला। हालांकि युद्ध के बाद वह निराश था और वर्साय संधि को जर्मनी का अपमान मानता था।
1934 में बना जर्मनी का तानाशाह
1919 में हिटलर जर्मन वर्कर्स पार्टी में शामिल हो गया। बाद में नाजी पार्टी (NSDAP) बनी। उसकी जबरदस्त वाक्पटुता और प्रचार कौशल ने उसे 1921 में पार्टी का मुख्य नेता बना दिया। 1923 का बियर हॉल पुट्च असफल रहा, इसमें उसे जेल हुई। हिटलर ने जेल में ही ‘माईन काम्फ’ नामक किताब लिखी। 1929 में आई महामंदी ने जर्मनी को तबाह कर दिया। तब हिटलर ने बेरोजगारी, अपमान और यहूदियों-कम्युनिस्टों को दोषी ठहराकर जनता को लुभाया। 1932 में नाजी पार्टी जर्मनी की सबसे बड़ी बन गई और 30 जनवरी 1933 को राष्ट्रपति हिंडनबर्ग ने उसे चांसलर नियुक्त किया। 1934 में हिंडनबर्ग की मौत के बाद हिटलर ने खुद को ‘फ्यूहरर’ घोषित कर लिया। उसने लोकतंत्र खत्म कर तानाशाही स्थापित की। इस प्रकार वह जर्मनी का तानाशाह बन गया।
ऑस्ट्रिया और पोलैंड पर किया कब्जा
तानाशाह बनने के बाद हिटलर ने अपनी मशीनरी से विरोधियों को कुचलना शुरू किया। 1935 के नूरेम्बर्ग कानूनों से यहूदियों के नागरिक अधिकार छीने गए। 1938 में ऑस्ट्रिया पर कब्जा किया और 1939 में पोलैंड पर हमला कर दिया। जर्मन सेना पोलैंड पर भी कब्जा करने लगी। इसके बाद द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत हो गई। हिटलर का लक्ष्य ‘आर्यन मास्टर रेस’ का साम्राज्य और ‘लेबेंसराउम’ पर कब्जा जमाना था।
हिटलर दुनिया में खौफ का पर्याय कैसे बना?
हिटलर के नाजी शासन में लगभग 60 लाख यहूदियों की क्रूरतम हत्या कर दी गई। यहूदियों को गैस चैंबर में डालकर, गोली मारकर और उन्हें भूखों रखकर मार दिया गया। इसके अलावा लाखों जिप्सी, विकलांग, समलिंगी, राजनीतिक विरोधी और सोवियत युद्धबंदी मारे गए। कुल मिलाकर युद्ध में 5-6 करोड़ लोगों की मौत हुई। हिटलर की नस्ली श्रेष्ठता की विचारधारा, प्रचार मंत्री गोएबल्स की झूठी प्रचार मशीन और एसएस की क्रूरता ने पूरे यूरोप में आतंक फैला दिया। वह शांति का दुश्मन बन गया था। उसने पोलैंड, फ्रांस, सोवियत संघ, ब्रिटेन आदि सभी देशों पर हमला कर दिया।
शुद्ध शाकाहारी था हिटलर
हिटलर के बारे में सबसे दिलचस्प बात यह है कि वह शुद्ध शाकाहारी था। वह चाय पीने और कुत्ते पालने का शौकीन था। शुरू में वह कलाकार बनना चाहता था, लेकिन असफल रहा। बाद में वह युद्ध के दौरान गैस अटैक के चलते एक आंख से अंधा हो गया था। उसकी प्रेमिका एवा ब्रॉन से उसकी शादी मौत से सिर्फ एक दिन पहले हुई। वह ड्रग्स (एम्फेटामाइन) का आदी हो गया था। उसका अंतिम भोजन सादा था और उसने अपने कुत्तों को भी जहर देकर मारा। हिटलर की मौत के बाद जर्मनी ने 7 मई 1945 को आत्मसमर्पण कर दिया। उसका ‘हजार वर्षीय रीच’ सिर्फ 12 साल चला। आज हिटलर नफरत, नरसंहार और तानाशाही का प्रतीक है। उसकी विचारधारा आज भी दुनिया को चेतावनी देती है कि अतिवाद और नस्लवाद कितना खतरनाक हो सकता है।
हिटलर को क्यों जाना पड़ा था जेल?
एडोल्फ हिटलर को अपनी मौत से पहले एक बार 1923 में जेल भी जाना पड़ा था। 8 नवंबर 1923 को हिटलर और उसके नाजी साथियों ने म्यूनिख (बवेरिया) के एक बियर हॉल (बर्गर ब्राउकेलर) में एक सभा के दौरान सरकार के खिलाफ बीयर हॉल पुश नामक असफल सशस्त्र विद्रोह करने की कोशिश की। उनका लक्ष्य बवेरिया की राज्य सरकार को गिराना था, फिर पूरे जर्मनी में मार्च करके बर्लिन पर कब्जा करना और वर्साय की संधि को रद्द करवाना था। हिटलर ने खुद को "राष्ट्रीय क्रांति" का नेता घोषित कर दिया और जनरल लुडेनडॉर्फ के साथ मिलकर यह कोशिश की। मगर विद्रोह पूरी तरह असफल रहा। पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें 16 नाजी समर्थक मारे गए। हिटलर भागने की कोशिश में घायल हुआ और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। दिसंबर 1923 में हिटलर को उच्च राजद्रोह का दोषी ठहराया गया। उसे 5 साल की जेल की सजा हुई। मगर जर्मनी की नरम नीतियों के कारण उसे सिर्फ 9 महीने लैंड्सबर्ग जेल में रहना पड़ा।